@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, महासमुंद। शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लिए ‘लघु शोध प्रविधि’ विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के अंतर्गत पाठ्यक्रम में शामिल शोध प्रविधि एवं लघु शोध-प्रबंध की संपूर्ण प्रक्रिया से विद्यार्थियों को परिचित कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दुर्गावती भारतीय तथा विभागीय प्राध्यापकों की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर डॉ. भारतीय के शोध-निर्देशन और मार्गदर्शन में एम.ए. हिंदी चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को शोध की मूल अवधारणा, विषय-चयन, उद्देश्य-निर्धारण, रूपरेखा-निर्माण, तथ्य-संग्रह, विश्लेषण और निष्कर्ष तक की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया।
कार्यशाला में सर्वप्रथम डॉ. कलमरेखा ने शोध की आवश्यकता और उसकी बौद्धिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “शोध की जिज्ञासा मनुष्य के भीतर शैशवावस्था से ही विद्यमान रहती है।” उन्होंने शोध समस्या के निर्धारण से लेकर उसके चरणबद्ध अध्ययन, तथ्यों के मूल्यांकन, विश्लेषण तथा समस्या-समाधान कौशल के विकास पर विस्तार से अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।
इसके पश्चात डॉ. जीवन चंद्राकर ने शोध कार्य की संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार रखते हुए विद्यार्थियों को कंप्यूटर एवं तकनीकी साधनों के व्यावहारिक उपयोग के माध्यम से शोध कार्य में नवाचार और गुणवत्ता वृद्धि के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला का एक महत्त्वपूर्ण भाग विद्यार्थियों की सहभागिता रहा, जिसमें छात्रों ने अपने चयनित लघु शोध-प्रबंध विषयों—जैसे स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श, वृद्ध विमर्श आदि—पर अपने शोध का उद्देश्य, स्वरूप एवं रूपरेखा प्रस्तुत की। इससे विद्यार्थियों में शोध के प्रति गंभीरता, प्रस्तुतीकरण-कौशल और अकादमिक दृष्टि का विकास स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।
कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए डॉ. दुर्गावती भारतीय ने विद्यार्थियों को उनके चयनित विषयों पर उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि “शोध का अर्थ ज्ञान का पुनरावलोकन, पुनर्विचार और नवीन संदर्भों में उसका परीक्षण करना है। लघु शोध-प्रबंध किसी विशिष्ट विषय पर किया गया संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित अध्ययन है, जो विद्यार्थियों के भावी शोध-कार्य की पूर्वपीठिका सिद्ध होता है।”
इस अवसर पर सरस्वती वंदना छात्रा दामिनी साहू द्वारा प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का संचालन योशिका ठाकुर ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रमोद बंजारे द्वारा किया गया।
कार्यशाला में सुश्री कल्याणी साहू सहित सहयोगी विद्यार्थियों में प्रशांत सोनवानी, खेमचंद, तुलसी, तनुजा, यशोदा, सीतेश्वरी, रेशमा, ईशा, लवली, कुसुम, दामिनी तथा द्वितीय सेमेस्टर के अनेक छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।








