@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, कुरुद। ग्राम नारी के प्रतिष्ठित और समाजसेवी नागरिक स्व. लखन लाल साहू (79 वर्ष) ने नेत्रदान कर मानवता और परोपकार का ऐसा उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। जीवन के बाद भी किसी को रोशनी देने का उनका संकल्प, समाज में सेवा और संवेदनशीलता की मिसाल बन गया है।

ज्ञात हो कि स्व. लखन लाल साहू ने अपने जीवनकाल में ही नेत्रदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के पश्चात उनके परिजनों ने इस पुण्य संकल्प को पूरी निष्ठा के साथ निभाते हुए चिकित्सकों को बुलाकर मरणोपरांत नेत्रदान कराया। उनके इस महान कार्य से अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी आने की उम्मीद जगी है।
इस अनुकरणीय पहल से पूरे क्षेत्र में जागरूकता की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने स्व. साहू के इस निर्णय की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरक बताया है।

सेवा की यह परंपरा यहीं नहीं रुकी। स्व. लखन लाल साहू की धर्मपत्नी केजिन बाई साहू (72 वर्ष) ने भी नेत्रदान की घोषणा कर समाज के सामने एक सशक्त संदेश दिया है कि सेवा और त्याग परिवार की साझा विरासत होती है। वहीं उनके परिजन नरेंद्र साहू एवं सरस्वती साहू ने भी नेत्रदान का संकल्प लेकर इस पुण्य मार्ग को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।
स्व. लखन लाल साहू का यह महान कार्य यह सिद्ध करता है कि
“मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी के जीवन में उजाला बन सकती है।”
नेत्रदान जैसे महादान से न केवल किसी को दृष्टि मिलती है, बल्कि समाज में करुणा, संवेदना और मानवता का संचार होता है।
यह घटना समाज के प्रत्येक व्यक्ति को यह सोचने पर विवश करती है कि यदि हम सब नेत्रदान जैसे संकल्प लें, तो अंधकार में जी रहे असंख्य लोगों के जीवन में भी रोशनी लाई जा सकती है।
स्व. लखन लाल साहू का जीवन और उनका नेत्रदान—सच में अमर प्रेरणा है।








