हंसती बिटिया…
ईश्वर का उपहार है, बेटी है वरदान।
जिस घर में बेटी हँसे, वो घर स्वर्ग समान।।आगे बढ़कर कर रहीं, कार्य क्षेत्र विस्तार।
सूर्योदय संसार में, होवें बारम्बार।।
’सुषमा’-सी छाया लगे, बिटिया है अभिमान।
जिस घर में बेटी हँसे, वो घर स्वर्ग समान।।
नाजुक सी कलिका बने, दो कुल की है शान
शस्त्र उठा काली बने, रक्षा निज अभिमान।।
रानी बिटिया लाडली, रखती माँ का ध्यान।
जिस घर में बेटी हँसे, वो घर स्वर्ग समान।।
मात-पिता सेवा करे, बाँध नेह की डोर।
रुनझुन पायल बज उठीं होकर भाव विभोर।।
दिल में पत्थर रख करें, बाबुल कन्यादान।
जिस घर में बेटी हँसे, वो घर स्वर्ग समान।।
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✍️कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल (रायपुर छ.ग.)








