संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। पर्युषण महापर्व का छठवां दिन उत्तम संयम धर्म के रूप में नगर के दिगंबर जैन समाज द्वारा बड़े ही श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया। सदर रोड स्थित जैन भवन सहित नगर के समस्त जिनालयों में सुगंध दशमी (धूप दशमी) पर्व की भव्य आराधना की गई।
प्रातःकाल भगवान श्री शीतलनाथ की पूजा-अर्चना व अभिषेक हुआ। इस अवसर पर मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया, मंडल विधान व मनोहारी झांकियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैन धर्मावलंबियों ने भगवान के चरणों में धूप अर्पित कर वायुमंडल को सुगंधित व पवित्र बनाया।
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के पालन से अशुभ कर्मों का क्षय होकर पुण्य की प्राप्ति होती है और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। महिलाएं विशेष रूप से इस व्रत को बड़ी श्रद्धा से करती हैं। दिनभर श्रद्धालुओं ने हिंसा, असत्य, चोरी, कुशील व परिग्रह त्याग का पालन करते हुए स्वाध्याय, सामयिक, धर्मचिंतन और जिनवाणी वाचन में समय व्यतीत किया।
संध्या आरती व भक्ति गीतों के पश्चात जैन भवन में बाल ब्रह्मचारी प्रिंस भैया का मंगल प्रवचन हुआ, जिसमें उत्तम संयम धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला गया। तत्पश्चात महावीर दिगंबर जैन पाठशाला के बच्चों ने “जैन धर्म की कहानी बच्चों की जुबानी” कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसने सभी का मन मोह लिया।
इस अवसर पर जैन भवन में प्रथम चार कलशों से अभिषेक का सौभाग्य मनोज-अनिल-जय कुमार जैन, प्रकाश-अंकित गदिया, शीलचंद-प्रभात जैन, राकेश-सत्यम-सुविधि चौधरी आदि को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य निर्मल कुमार, अजय, सौरभ, समीर सहित आर्जव व सिंघाई परिवार को प्राप्त हुआ।
श्री शांतिनाथ जिनालय में राकेश कुमार, सत्यम, सुविधि, ध्रुव, संयम चौधरी परिवार तथा निखिलेश, नीलम चंद, नितिन जैन परिवार को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ। वहीं श्री पार्श्वनाथ जिनालय में सुनील, पलक, मनीष जैन परिवार व राजकुमार काबरा परिवार को शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त हुआ।








