संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। विद्यालय जिसे विद्या व ज्ञान का मंदिर कहा जाता है। बच्चे यहां पढ़कर लिखकर ज्ञान हासिल करते हैं। पढ़ लिखकर इंसान बनते हैं। कोई डॉक्टर बनता है कोई कलेक्टर,कोई जज,कोई वकील ,कोई वैज्ञानिक,तो कोई व्यापारी ,कोई बड़ा ऑफिसर बनता है। अगर शिक्षा का मंदिर ही जीर्ण शीर्ण हो, समस्याओं से ग्रसित हो, जहां अव्यवस्थाओं का आलम हो वहां पर अच्छी शिक्षा की कल्पना कहां की जा सकती है? नवापारा नगर के हृदय स्थल व सबसे व्यस्ततम मार्ग सदर रोड में एक ऐसा ही बहुत ही पुराना स्कूल है बढई पारा स्कूल । इस नए शिक्षा सत्र से वर्तमान में यहां पर तीन स्कूल संचालित हो रहे हैं। शासकीय प्राथमिक शाला , शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला एवं शासकीय पूर्व माध्यमिक कन्या शाला के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। स्कूल की हालत काफी जर्जर अवस्था में है। फिर भी यहां पर कक्षाएं लगाई जा रही हैं। बच्चों की जान हमेशा जोखिम में रहती है। स्कूल प्रबंधन यहां पर स्कूल लगाने के लिए मजबूर है। यहां पर कभी भी गंभीर दुर्घटना घट सकती है जिसकी चिंता ना तो शासन को है ना ही प्रशासन को।

पिछले दिनों बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन बनाने वाले कमरे मे ऊपर का प्लास्टर भरभरा कर नीचे गिर गया। अगर वहां पर मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रहते तो एक बड़ी अनहोनी घटना हो सकती थी। पर किसी भी प्रकार की जन हानि नहीं हुई।कुछ समय पहले वहां पर मध्यान्ह भोजन तैयार हो रहा था। नगर वासियों व पालकों ने मांग की है कि स्कूल को तोड़कर नया स्कूल भवन बनाया जाए।








