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विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल का विस्तार 18 अगस्त को संभव
@विशेष रिपोर्ट सतीश शर्मा, प्रधान संपादक
रायपुर। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार 18 अगस्त को तीन नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। मुख्यमंत्री साय ने शनिवार को राजभवन जाकर राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की और संभावित मंत्रियों की सूची सौंपी।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, सरगुजा से विधायक राजेश अग्रवाल, दुर्ग शहर से विधायक गजेंद्र यादव और आरंग से विधायक गुरु खुशवंत साहेब को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। खास बात यह है कि तीनों ही पहली बार विधायक बने हैं और सीधे मंत्री पद पर आसीन होंगे।
समुदायों और राजनीतिक संतुलन को साधने की कोशिश

राजेश अग्रवाल को बिजनेस कम्युनिटी और विशेषकर अग्रवाल-जैन समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए मंत्री बनाया जा रहा है। हालांकि, अमर अग्रवाल और राजेश मूणत जैसे दिग्गज नेता भी दावेदार थे, परंतु “नए चेहरों को मौका” फार्मूले के चलते उनकी दावेदारी खत्म हो गई।
गजेंद्र यादव आरएसएस के कोटे से मंत्री बनाए जा रहे हैं। उनके पिता बिसराराम यादव छत्तीसगढ़ के प्रांत संघचालक रहे हैं। यादव की एंट्री के साथ ही साय मंत्रिमंडल में ओबीसी वर्ग के मंत्रियों की संख्या सात हो जाएगी।
गुरु खुशवंत साहेब को सतनामी समाज को साधने की रणनीति के तहत शामिल किया जा रहा है। अभी अनुसूचित जाति वर्ग से केवल दयालदास बघेल मंत्री हैं।
सियासी समीकरण और विभागों में फेरबदल
तीनों नए मंत्रियों की नियुक्ति के बाद साय मंत्रिमंडल में कुल मंत्रियों की संख्या 13 हो जाएगी। अभी दो पद रिक्त हैं और एक अतिरिक्त मंत्री पद हरियाणा फार्मूले के तहत जोड़ा जा रहा है।
माना जा रहा है कि विस्तार के साथ ही विभागों का बड़ा फेरबदल भी होगा। मुख्यमंत्री अपने पास से कई विभाग नए मंत्रियों को सौंप सकते हैं, वहीं पुराने मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
सियासत गरमाई
साय मंत्रिमंडल में इस नए विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सवाल उठ रहा है कि पहली बार विधायक बने चेहरों पर भरोसा जताकर साय ने क्या पार्टी के पुराने दिग्गजों को दरकिनार करने का बड़ा संदेश दिया है? यहां अनुभवी कहे जाने वाले दिग्गज नेताओं राजेश मूणत, अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर, धरमलाल कौशिक को किनारे कर दिया गया है। साय सरकार में यह प्रयोग कितना कारगर होता है यह अभी समय के गर्भ में है।








