@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, धमतरी/मगरलोड। मगरलोड शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में वर्षों से जमे फर्जीवाड़े की दीवार आखिरकार गिरा दी गई। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सख्त आदेश पर फर्जी नियुक्ति के आधार पर पदोन्नत हुए 8 प्रधानपाठकों को उनके-उनके स्कूलों से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई से जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
इन स्कूलों के प्रधानपाठकों पर गिरी गाज
जिला शिक्षा अधिकारी अभय जायसवाल ने पुष्टि की कि निम्नलिखित शासकीय प्राथमिक शालाओं में पदस्थ प्रधानपाठकों की सेवाएं समाप्त की गई हैं—
- हरिशंकर साहू, शासकीय प्राथमिक शाला चटरीजाहरा, विकासखंड नगरी
- पुनम सीनयानी, शासकीय प्राथमिक शाला करमाटी, विकासखंड नगरी
- हेमंत कुमार साहू, शासकीय प्राथमिक शाला करेली छोटी, विकासखंड मगरलोड
- लता साहू, शासकीय प्राथमिक शाला खिसोरा, विकासखंड मगरलोड
- श्रीमती युकेश, शासकीय प्राथमिक शाला भांठापारा, विकासखंड मगरलोड
- मंजु खुटेर, शासकीय प्राथमिक शाला भरदा, विकासखंड मगरलोड
- ईश्वरी निर्मलकर, शासकीय प्राथमिक शाला सोनारिनदैहान, विकासखंड मगरलोड
- लखनलाल साहू (पूर्व से निलंबित), शासकीय प्राथमिक शाला विश्रामपुर, जिला धमतरी
भर्ती नहीं, खुला भ्रष्टाचार था
साल 2007 की शिक्षाकर्मी भर्ती में स्वीकृत 150 पदों के बजाय 172 नियुक्तियां कर दी गई थीं।
अंकों में हेरफेर करने, अनुभव व स्काउट-गाइड के फर्जी प्रमाणपत्र, चयन समिति से लेकर जनप्रतिनिधियों तक की मिलीभगत से शिक्षाकर्मी भर्ती में बड़ा गड़बड़झाला हुआ था।
एक व्यक्ति की लड़ाई बनी मिसाल
ग्राम चंदना निवासी कृष्ण कुमार साहू की शिकायत और RTI से 2011 में घोटाले का भंडाफोड़ हुआ। बाद में CID जांच में मामला इतना गंभीर निकला कि—
105 आरोपी बनाए गए जिसमे 4 तत्कालीन अधिकारी, 7 जनप्रतिनिधि शामिल है उनमें से अब तक 28 दोषियों को सजा हुई है। 15 आरोपियों की मृत्यु, कई फरार या इस्तीफा देकर बच निकले हैं।
सवाल अब भी बड़े
17 साल बाद हुई यह कार्रवाई बताती है कि फर्जी नियुक्ति चाहे जितनी पुरानी हो, बच नहीं सकती।
मगरलोड का यह मामला सिर्फ कुछ स्कूलों या शिक्षकों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।
जो आज भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे कुर्सी पर बैठे हैं—
उनकी फाइलें भी खुल सकती हैं, बस वक्त का इंतजार है।








