संवाददाता तुकाराम कंसारी
कृषि विभाग की चुप्पी से नाराज ग्रामीण, राहत की मांग
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। कम और असमय बारिश के कारण अंचल के किसानों की धान की फसल इस बार भूरा माहु सहित कई कीट जनित बीमारियों की चपेट में आ गई है। चंपारण, सेमरा, भोथी, टीला, डंगनिया सहित अनेक गांवों के किसानों ने बताया कि उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है।
चंपारण के किसान दाऊ लाल साहू, ईश्वर चंद साहू, थानेश्वर साहू, हेमलाल साहू, वेदप्रकाश निषाद व रिखी राम निषाद ने बताया कि करीब 1500 एकड़ भूमि पर धान की फसल पूरी तरह संकट में है। किसानों ने चार से पांच बार महंगे कीटनाशकों का छिड़काव किया, बावजूद इसके कीट प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा।
ग्राम सेमरा निवासी शोभाराम साहू के अनुसार, क्षेत्र की लगभग 25 प्रतिशत फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। कई गांवों में निराश किसान ग्राम व खार देवता की पूजा-पाठ कर रहे हैं ताकि फसल को बचाया जा सके। किसान सुबह से लेकर रात तक, तेज धूप और बारिश के बीच भी कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं।
गरीब और सीमांत किसान, जिन्होंने कर्ज लेकर एक-दो एकड़ में खेती की है, वे सबसे ज्यादा परेशान हैं। लगातार दवाइयों में खर्च के बाद भी आधी फसल तक नष्ट हो चुकी है। किसानों का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारी अब तक गांवों तक नहीं पहुंचे, जिससे आक्रोश और बढ़ रहा है।
किसानों का आरोप है कि अत्यधिक तापमान और कम/असमय बारिश की वजह से बीमारियों का फैलाव और तेज हो गया है। अब स्थिति यह है कि उधारी में खरीदी गई दवाइयों का पैसा चुकाने के लिए भी किसानों के पास साधन नहीं बचे हैं।
चंपारण के किसान विजय कुमार साहू, दुष्यंत साहू, ईश्वर साहू, रिखी राम निषाद, खेमू सहित अनेक ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि तुरंत राहत एवं मदद के कदम उठाए जाएं।
इस संबंध में विकासखंड कृषि विस्तार अधिकारी श्री तिवारी ने बताया कि “अत्यधिक उमस के कारण कीट प्रकोप की शिकायतें आ सकती हैं। यदि किसानों ने ऐसी समस्या बताई है तो विभागीय टीम दौरा कर आवश्यक मार्गदर्शन और कार्रवाई करेगी।”








