संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम। नवीन मेला स्थल राजिम चौबेबांध से लक्ष्मण झूला तक करीब 3.50 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित 4 लेन सड़क का भूमिपूजन समारोह बड़े-बड़े दावों के साथ तो संपन्न हो गया, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) की व्यवस्थागत लापरवाही, संगठनात्मक असफलता और जनसंपर्क की पूरी कमी ने पूरे आयोजन को विवादों में घेर लिया। विकास कार्य की शुरुआत का शुभ अवसर जहां क्षेत्रवासियों के लिए खुशी का मौका होना चाहिए था, वहीं PWD विभाग की उदासीनता और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही ने इसे शर्मनाक उदाहरण बना दिया। सबसे गंभीर आरोप पार्टी के वरिष्ठ, अनुभवी और जमीनी स्तर के सक्रिय नेताओं की अनदेखी का है। उनके नाम न आमंत्रण कार्ड में शामिल किए गए। इससे कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष फैल गया। PWD विभाग ने यदि आयोजन की जिम्मेदारी संभाली या समन्वय किया होता तो यह स्थिति नहीं आती। जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित रखना विभाग की संकीर्ण सोच को उजागर करता है। मीडिया जगत में भी PWD की लापरवाही साफ नजर आई। स्थानीय पत्रकारों का सीधा आरोप है कि उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया गया। केवल कुछ “चहेते” या करीबी पत्रकारों को बुलाया गया, जो पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ है। विकास कार्य जैसे सार्वजनिक महत्व के कार्यक्रम में मीडिया को नजरअंदाज करना PWD विभाग की जवाबदेही से मुंह मोड़ने का स्पष्ट संकेत है l आयोजन स्थल पर खाली पड़ी कुर्सियों की तस्वीर तो पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी विफलता बन गई। बड़े स्तर के दावों के बावजूद अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी। खाली कुर्सियां साफ बता रही थीं कि आमंत्रण और जनसंपर्क की व्यवस्था में PWD विभाग और संबंधित जिम्मेदारों ने पूरी तरह से कोताही बरती। मंच से परियोजना की महत्ता और विकास के ऊंचे-ऊंचे दावे किए गए, लेकिन व्यवस्थागत कमियों ने पूरे आयोजन की चमक फीकी कर दी। यह सड़क राजिम जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हर साल लगने वाले मेले, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और पर्यटन को नई दिशा देने वाली यह परियोजना आवागमन को सुगम बनाएगी। लेकिन भूमिपूजन जैसे शुभारंभ में ही यदि PWD विभाग इतनी बड़ी लापरवाही बरतता है तो आगे निर्माण कार्य में क्या स्थिति होगी, यह सोचने वाली बात है।

कुल मिलाकर, PWD विभाग की उदासीनता, नेताओं की अनदेखी, पत्रकारों का बहिष्कार और खाली कुर्सियों वाली तस्वीर ने विकास के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। क्षेत्रवासियों की उम्मीद है कि विभाग अब जिम्मेदारी समझे, संगठनात्मक समन्वय सुधारे और भविष्य में ऐसे आयोजनों में पारदर्शिता तथा जनसंपर्क सुनिश्चित करे। अन्यथा विकास कार्य की शुरुआत ही विवादों में घिरती रहेगी।
इसी भूमि पूजन को लेकर आगे आने वाले समय में कुछ एक और विभाग के मामले देखें जा सकते है, जिसका खुलासा जल्द ही किया जाएगा I








