‘छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस’ पर महतारी की पूजा पूरे प्रदेश में, लेकिन नारी पंचायत में प्रतिमा शर्मसार—जनप्रतिनिधियों की गैर-जिम्मेदारी उजागर
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, धमतरी/कुरुद। ग्राम पंचायत नारी इन दिनों गंभीर सवालों के कटघरे में है। छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान की प्रतीक छत्तीसगढ़ महतारी की टूटी हुई प्रतिमा पंचायत भवन परिसर में अपमानित अवस्था में खड़ी है, और हैरानी की बात यह है कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए पंचायत ने इस मूर्ति को लाल कपड़ा डालकर ढंक दिया—मानो सच को छिपाने से सच बदल जाएगा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह ‘ढंकने की क्रिया’ ठीक उसी दिन की गई, जिस दिन पूरा प्रदेश 1 नवंबर—छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना और सम्मान में कार्यक्रम आयोजित कर रहा था। जहां पूरे राज्य में महतारी की वंदना हो रही थी, वहीं ग्राम पंचायत नारी में वही महतारी लाल कपड़े तले शर्मसार खड़ी रही।

यह दृश्य केवल एक टूटी मूर्ति का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, जनप्रतिनिधियों की असंवेदनशीलता और पंचायत की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। आखिर पंचायत के पास रंग-रोगन करवाने अथवा मूर्ति मरम्मत जैसी मूलभूत गरिमा-रक्षा के लिए भी धन नहीं है क्या?
यदि पैसा नहीं था, तो प्रस्ताव क्यों नहीं? यदि प्रस्ताव था, तो कार्य क्यों नहीं? और यदि कार्य नहीं किया गया, तो आखिर जवाबदेही किसकी?
ग्राम पंचायत नारी में यह प्रकरण केवल अव्यवस्था नहीं, छत्तीसगढ़ महतारी की गरिमा से सीधी छेड़छाड़ है—जिसे न तो नजरअंदाज किया जा सकता है और न ही लाल कपड़े से छिपाया जा सकता है।
स्पष्ट है कि यह पंचायत की लापरवाह कार्यशैली, जनप्रतिनिधियों की असंवेदनशीलता और प्रशासन की उदासीनता का जीता-जागता सबूत है।









