@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, रायपुर/धमतरी। हास्य-व्यंग्य साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वाले, अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों के लोकप्रिय मंच संचालक तथा जिला हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक सुरजीत नवदीप का सोमवार को निधन हो गया। उनकी सहज हास्य शैली, व्यंग्य में निहित सामाजिक संदेश, और मंचीय उपस्थिति ने उन्हें पूरे देश में प्रिय और सम्मानित बनाया। उनके निधन से धमतरी ही नहीं, पूरे प्रदेश का साहित्यिक समाज शोक में डूब गया है।
सुरजीत नवदीप का जन्म 1 जुलाई 1937 को मंडी भवलदीन (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने एम.ए. हिंदी, बी.एड. और सी.पी.एड. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकाल तक सेवा देने के बाद वे स्वतंत्र लेखन एवं साहित्य सेवा में सक्रिय रहे। हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज की विसंगतियों को सामने लाना, उन्हें जन-जन तक पहुँचाना, तथा युवाओं को प्रेरित करना उनका मिशन रहा।
वे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सदस्य भी रह चुके थे। उनके साहित्य में हास्य के साथ-साथ सामाजिक चिंतन, जनहित की आवाज और निर्भीक व्यंग्य का विशेष स्थान रहा है। देश की विविध पत्र-पत्रिकाओं में गीत, ग़ज़ल, हास्य-व्यंग्य कविता तथा कहानियों का प्रकाशन हुआ। रेडियो और दूरदर्शन में भी वे अनेक बार काव्यपाठ और कार्यक्रमों के संचालन के लिए आमंत्रित किए गए।
साहित्य जगत में शोक और श्रद्धांजलि
धमतरी जिला हिन्दी साहित्य समिति के अध्यक्ष डुमन लाल ध्रुव ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा—
“हास्य के साथ-साथ समाज की गंभीरताओं पर ध्यान आकर्षित करने वाला यह व्यक्तित्व हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।”छत्तीसगढ़ लोकदर्शन के प्रधान संपादक सतीश शर्मा ने उन्हें याद करते हुए कहा—
“सुरजीत नवदीप दादा का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक उज्ज्वल विचारधारा, निर्भीक लेखनी और समाज में जागरूकता फैलाने वाली परंपरा का क्षरण है। उनकी लेखनी, उनका साहस और आत्मीयता हमें सदैव प्रेरित करती रहेगी।”
साहित्य प्रेमी और सहयोगी उनकी स्मृतियों को साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उनके योगदान ने हिंदी साहित्य को न केवल समृद्ध किया, बल्कि समाज में हास्य और व्यंग्य के माध्यम से बदलाव की राह भी दिखाई।








